Surya ke 12 Bhav ke Phal aur Upay | सूर्य किस घर में क्या प्रभाव देता है
परिचय
सूर्य उच्च का ग्रह माना जाता है। यह पिता, आत्मा समाज में मान, सम्मान, यश, कीर्ति, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा का करक होता है । इसकी राशि है सिंह |
कुंडली में सूर्य के अशुभ होने पर पेट, आँख, हृदय का रोग हो सकता है साथ ही सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। इसके लक्षण यह है कि मुँह में
बार-बार बलगम इकट्ठा हो जाता है, सामाजिक हानि, अपयश, मनं का दुखी या असंतुस्ट होना, पिता से विवाद या वैचारिक मतभेद सूर्य के पीड़ित होने के सूचक है ।
सूर्य का प्रथम भाव मे फल
सूर्य शुभ
धर्म कर्म करने वाले, दानी, धर्मशाला, कूप, प्याऊ आदि का निर्माता, पितृभक्त किन्तु स्वयं की संतान पितृभक्त न ही हो । मद्यपान से घृणा,
दीन दुखी का सेवक, क्रोधी, सर्वदा लाभ होता रहे, राज्याश्रित का जीवन, आंखों देखी बात पर विश्वास करे, कान से सुने पर करे नहीं ।
सूर्य अशुभ
सूर्य शत्रुराशिस्थ, नीच पापाक्रान्त हो और शुक्र का सप्तम भाव से सम्बन्ध हो, तो बाल्यावस्था में ही पिता की मृत्यु हो । सूर्य प्रथम भाव में तथा मंगल पंचम भाव में होने से एक के बाद एक पुत्र मृत्यु को प्राप्त होवे,
अशुभफल कारक सूर्य प्रथम भाव में तथा सूर्य, मंगल और गुरू भी निर्बल व अशुभ फलप्रद हों, तो प्रतिष्ठारहित अभागा जीवन व्यतीत करे। सूर्य प्रथम और शनि अष्टम हो, तो द्विभार्या योग निश्चित है।
उपाय
पैतृक घर में हैण्डपम्प लगावे तथा किसी परस्त्री से सबंध बनाने से बचे। विशेषकर गायिका या अभिनेत्री से।
द्वितीय भाव मे फल
सूर्य शुभ
द्वितीय भाव में सूर्य और गुरू स्थित हो, शनि से अदृष्ट हों, तब ननिहाल, लडकी का ससुराल धनी होगा, किसी शत्रु का 11 दिन 11 मास व 11 वर्ष में नाश होगा।
जातक पारिवारिक व्यक्तियों का सेवक एवं अपने भुजबल पर द्रव्योपार्जन कर्ता । उपरोक्त फल यदि चन्द्र 6ठे भाव में हो, तो विशेष होगा। सुर्य धनभाव में,
राहु अष्टम भाव में तथा केतु अष्टम भाव में हो, तो जातक योग्य व सत्यवादी होगा, यदि राहु नवम भाव में हो, तो पेन्टर व चित्रकार होगा। सूर्य द्वितीय में व केतु
नवम में हो, तो जातक टैक्नीशियन होगा । मंगल नवम में हो, तो शौकीन होगा । शनि दशा में हो, कुशाग्र बुद्धि व सम्मानित होगा । शनि एकादश में व सूर्य धनभाव में हो, तो दुखी कभी धनी कभी दरिद्र होवें ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य द्वितीय भाव में हो, तो धन, स्त्री, सम्पत्ति के झगडे होते हैं, स्त्री, माता, भाभी, बहिन इनके सुख की हानि होती है । सूर्य धन भाव में, चन्द्र अष्टम भाव हो,
तो किसी भी प्रकार का दान लेना महाअशुभ फल कारक होगा । धन भाव में सूर्य, मंगल लग्न में तथा चन्द्र द्वादश भाव में हो, तो जातक को सर्वदा आर्थिक कष्ट व दुखी बनाये रखेगा ।
उपाय
शनि की वस्तुओं का दान जप करना, नारियल, तेल, होगा, बादाम का धर्मस्थल में दान करे । स्वयं किसी का दान न लेवे ।
तृतीय भाव मे फल
सूर्य शुभ
अपने भुज बल से द्रव्योपार्जन का सुखी, ज्योतिष विषय का ज्ञाता, गणितज्ञ, बौद्धिक कार्यो से लाभ, सदाचारी नहीं रहे, तो अस्वस्थ व भाग्यहीन होवे ।
यदि चन्द्र भी कुण्डली में शुभ तो आजीवन आर्थिक लाभ हो । विशेष कर चन्द्रमा की वस्तुओं का धन्धा करने पर लाभ हो । चोरी की वस्तुओं का ग्रहण नहीं करे,
सूर्य व बुध तृतीय भाव में हो, तो भाई-भतीजे से लाभ होगा ।
सूर्य अशुभ
तृतीय भाव में अशुभ सूर्य हो तथा कुण्डली में चन्द्र भी अशुभ फल-प्रद हो, तो चोरी से विशेष धन की हानि होवे । सूर्य तृतीय में और प्रथम भाव भी अशुभ फलप्रद हो,
तो पडौसी बर्बाद होंगे । सूर्य तृतीय में बुध या पापग्रह भी अशुभ हो, तो मामा के लिये हानिप्रद होंगे ।
उपाय
पापकर्म से बचें। चाल चलन ठीक रखें ।
चतुर्थ भाव मे फल
सूर्य शुभ
चतुर्थ भाव में शुभफल कारक सूर्य हो, तो वृद्धावस्था का जीवन आर्थिक दृष्टि से उत्तम रहे, सन्तान धनी हो, स्वयं श्रेष्ठ प्रशासक व दयालु होवे ।
कुण्डली में चन्द्र व गुरु जिस भाव में स्थित हों युति उस भाव-सम्बन्धी वस्तुओं से द्रव्य लाभ होवे । सूर्य चन्द्र की युति चतुर्थ भाव में नए शोध के भरपूर लाभ हो ।
सूर्य मंगल की युति, विनम्र व धैर्यवान् बनाती है । सूर्य बुध की युति, चतुर्थ में श्रेष्ठ व्यापारी बनाती है तथा यात्रा से लाभ प्रदान करती है । सूर्य चन्द्र शुक्र की,
युति भाग्यवान् माता-पिता से लाभ व श्रेष्ठ कर्मो के करने की प्रवृत्ति बढाती है सूर्य, चन्द्र, मंगल की चतुर्थ में युति, सोने व चांदी से लाभ दिलाती है ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य जातक को लालची व अनेक प्रकार से कष्टभोगी बनाता है । तस्कर-वृत्ति भी बनाता है । सूर्य चतुर्थ में शनि सप्तम में नेत्र रोगी,
सूर्य चतुर्थ में अन्य पापग्रह भी अशुभ फलप्रद हो, तो सन्तान का सुख प्राप्त होता है । सूर्य चतुर्थ में और मंगल दशम में भाग्यशाली और नेत्र रोगी होता है ।
सूर्य चतुर्थ में दशम भाव में चन्द्र, गुरु व बुध में से कोई ग्रह हो, तो अशुभ फल कारक होते हैं । सूर्य चतुर्थ में गुरु दशम में हो, तो सुवर्ण की चोरी हो जाय,
शनि की वस्तुओं का व्यापार हानिप्रद हो, मातृपितृ सम्बन्धी कार्य शुभ हो तथा गुप्त शत्रुबाधा भी बनी रहे ।
उपाय
पैतृक घर में अन्धों को भिक्षा दें तथा भोजन का दान अन्धों को देवे । लोहे व लकडी का काम कभी न करे । वस्त्र, सोना, चाँदी का धन्धा अवश्य करें ।
पंचम भाव मे फल
सूर्य शुभ
भेड, बकरी पालने से लाभ, रसोई घर पूर्व में बनाने से लाभ, वृद्धावस्था में सुखी तथा सन्तान व परिवार की उन्नति हो । सूर्य पंचम में व शनि एकादश में हो,
तो माता-पिता दीर्घायु होंगे तथा सर्वदा उन्नति होती रहे । सूर्य पंचम में गुरु नवम् व द्वादश में शत्रुजित् बनाकर सन्तानसुख की हानि करता है ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य पंचम में गुरु दशम में हो, तो स्त्री की मृत्यु होती रहे । अशुभ फलकारक शनि तृतीय भाव में और अशुभ सूर्य पंचम में हो, तो पुत्रों का विनाश हो ।
उपाय
लाल मुंह बन्दरों का पालन-पोषण करें। पक्षी, मुर्गा व बच्चों का पालन-पोषण करे तथा घर में पूर्व दिशा में रसोईघर बनावे ।
षष्ठम भाव मे फल
सूर्य शुभ
षष्ठम भाव में शुभ सूर्य से क्रोधी, राज्याश्रित जीवन निर्विघ्रता से आजीवीकाप्रद, प्रतिष्ठित व धनी होती है। सूर्य षष्ठ में व केतु प्रथम या सप्तम भाव में हो,
तो राज्य से लाभ प्राप्त हो तथा पुत्र सुख होगा । 48 वर्ष के बाद का जीवन अधिक श्रेष्ठ रहेगा । द्वितीय में चन्द्र, मंगल या गुरु हो व षष्ठ में सूर्य हो,
तो प्राचीन सिद्धान्तों पर चलने वाला होगा ।
सूर्य अशुभ
ननिहाल व सन्तान पर दुष्प्रभाव अशुभ सूर्य 6 वें हो, तो मन्द दृष्टि मामा पुत्र व स्वयं के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव होवे । रात्रि को नींद कम आवे ।
सूर्य षष्ठ में व मंगल दशम में पुत्र का विनाश कर । षष्ठ में सूर्य व द्वादश में चन्द्र हो, तो पत्नी अथवा स्वयं काना हो । राहु व शनि प्रथम भाव में हो,
तो 42 से 50 तक की आयु का समय अत्यन्त नष्ट हो ।
उपाय
पैतृक घर की पिछली दीवार में रोशनदान न रखें । धर्म स्थल पर दान दी गई वस्तु अपने पास रखें ।

सप्तम भाव मे फल
सूर्य शुभ
शुभ फलप्रद सूर्य सप्तम भाव में हो और गुरु, मंगल या चन्द्र दूसरे भाव में हो, तो जातक सरकार में मंत्री होगा । यदि बुध, गुरु या शुक्र 2, 3 या 5
वें भाव हो विदेश में आजीविका करता है तथा मृत्यु जन्मस्थान में होती है । उच्चस्थ बुध 5 वें या 7 वें भाव में मंगल से दृष्ट हो तो लाभ पक्ष श्रेष्ठ हो,
तो प्रत्येक योग में शुभ सूर्य सप्तम में तो होगा ही । सप्तम में सूर्य क्षय रोग, अग्निकाण्ड, आत्महत्या, भवन आदि निर्माण में विघ्न उत्पन्न करता है
तथा स्वभाव क्रोधी बनाता है । शनि, बुध या केतु 2 रे भाव में हो, तो पराई परेशानियां बढे ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य सप्तम में हो और 2 रे शुक्र या पापग्रह हो, तो पत्नी माता-पिता के कष्ट से दुखी रहे, ससुराल भी नष्ट हो । गुरु, शुक्र या पापग्रह 11वें
भाव में सप्तम में सूर्य अशुभ हो, तो परिवार में अनेक व्यक्तियों की मृत्यु से जातक दुखी रहे, घर में दमा, खांसी, क्षय रोग बना रहे, कर्ज से लद जाये ।
केतु प्रथम भाव में या बुध 11 वें भाव में हो, तो पौत्र व नाती के उत्पन्न होने के समय स्वास्थ्य खराब रहे । सप्तम अशुभ सूर्य से व्यक्ति नमक खाता है,
क्रोधी होता है, अपयश मिलता है ।
उपाय
नमक कम खायें, मीठा पदार्थ मुंह में डाल कर अथवा पानी पीकर प्रत्येक कार्य का शुभारंभ करें । भोजन से पूर्व रोटी के टुकडे की आहूति अग्नि में देवें ।
अष्ठम भाव मे फल
सूर्य शुभ
शुभ सूर्य में शत्रु पराजित, 22वें वर्ष में राजकीय लाभ होवे । सूर्य अष्टम जातक को तपस्वी सत्यवादी व नृप तुल्य बनाता है ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य अष्टम में हो और गुरु भी अशुभ हो, तो भाग्यहीन होता है । अष्टम अशुभ सूर्य होने से जातक क्रोधी,
अधीर स्त्रियों का प्रेमी और अनेक आपत्तियों से त्रस्त रहता है ।
उपाय
काली गाय व बडे भाई की सेवा करें । दक्षिण द्वार जिस भवन का हो उस में नहीं रहें । मीठा खाकर या पानी पीकर कार्यारम्भ करें ।
नवम भाव मे फल
सूर्य शुभ
शुभ सूर्य 9वें बुध 7वें हो, तो भाग्योदय 34 वें वर्ष में होवे । नवमस्थ शुभ सूर्य परिवार सौख्य, कुटुम्ब पालन में अधिक व्यय
तथा माता-पिता का राज्याश्रित जीवन आदि योगकारक होता है और दीर्घायु भाग्यवान, सदाचारी, परोपकारी भी बनता है ।
सूर्य अशुभ
सूर्य नवम् में अशुभ होता है, तो जातक दुष्ट व भाइयों से दुखी रहे । बुध । से युक्त होने पर यह योग अधिक प्रबल होता है ।
उपाय
चन्द्रमा की वस्तुओं का दान करें। स्वयं कोई दान न लेवें, घर में पीतल के पुराने बर्तन रखें । पाप से बचें।
दशम भाव मे फल
शुभ सूर्य
दशमस्थ सूर्य राज्याधिकार प्रदान करता है, धनी, मानी, एवं स्वस्थ बनाता है, लेकिन सनकी मिजाज बनाता है ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य पुरुष ग्रह से युक्त वा दृष्ट न हो और चन्द्रमा पंचमस्थ होवे तब अल्पायु दुखी व संतान का विनाश करता है । सूर्य दशम में चन्द्र
4 हो तो राजकीय सुख उत्तम रहे । सूर्य दशम में नौकर चाकर व वाहन का सुख भी देता है । शुक्र चतुर्थ में तथा शनि अशुभ हो तो बचपन में
ही पिता की मृत्यु हो । यदि चन्द्रमा 2 रें भाव में हो, तो 24 वें वर्ष में माता को अरिष्ट होगा । सूर्य दशम में हो, षष्ट या अष्ठम भाव में पापग्रह हो,
तो 34 वर्ष तक सारा परिवार दुखी रहेगा । सूर्य दशम में हो तथा चतुर्थ भाव में कोई ग्रह नहीं हो, तो राजकीय लाभ न हो ।
उपाय
सफेद या शर्बती टोपी व पगडी से सदा सिर ढका रखें, काले, नीले वस्त्रों का त्याग करे, कूप, हैण्डपम्प व प्याऊ लगावें, गंगाजल घर में रखें व नदी-नाले के बहते पानी में 40 या 43 दिन तक तांबे का पैसा बहायें ।
ग्यारहवें भाव मे फल
सूर्य शुभ – शुभ सूर्य 11 वें हो और मांसाहारी न हो, तो 3 पुत्र की प्राप्ति, दीर्घायु, घर का मुखिया या राज्याधिकारी होवे ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य 11 वें भाव में पुरुष ग्रहों से युक्त वा दृष्ट न हो तथा 5 वें चन्द्र हो, तो संतानहीन हो ।
उपाय
रात्रि को 5 मूली या बादाम सिरहाने रख कर अगले दिन प्रात:काल मंदिर में देने पर दीर्घायु हो और सन्तान प्राप्ति हो ।
मांस सर्वथा वर्ज्य है। शराब का सेवन न करें। झूठी गवाही न दें । धोखा-धड़ी न करें ।
बारहवें भाव मे फल
सूर्य शुभ
शुभ सूर्य 12 वें हो और शुक्र, बुध की युति हो, तो आजीविका कभी बन्द न हो, व्यापार से लाभ मिले ।
सूर्य द्वादश में केतु 2 रे भाव में हो, तो 24 वें वर्ष से द्रव्योपार्जन करने लगे ।
सूर्य अशुभ
अशुभ सूर्य द्वादश में – उदासीनता, मष्तिष्क में विकृति, राज्यभय, अपयश मशीनरी के धंधे में हानि, ससुराल की सहायता करने से हानि
प्रदान करता है । सूर्य 12 वें चन्द्र 6 वें हो, तो जातक अथवा उसकी स्त्री कानी हो । सूर्य द्वादश में, पापग्रह लग्न में हो,
तो नींद हराम हो तथा दुखी रहे ।
उपाय
राहु सम्बन्धी कार्य न करें, ससुराल का भी कोई कार्य न करें। आटा से ग्रहस्थ सुखमय हो । पीसने की चक्की घर पर रखें ।
अन्धकारयुक्त घर में निवास न करें। धोखा धडी, गबन, झूठी गवाही, असत्य भाषण का त्याग करें ।
सूर्य शांति के उपाय व मंत्र
- भगवान राम की आराधना करे।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे।
- सूर्य को हल्दी व शक्कर डालकर आर्घ्य दे।
- गायत्री मंत्र का जाप करे।
- ताँबा, गेहूँ एवं गुड का दान करें।
- प्रत्येक कार्य का प्रारंभ मीठा खाकर करें।
- ताबें के एक टुकड़े को काटकर उसके दो भाग करें। एक को पानी में बहा दें तथा दूसरे को जीवन भर साथ रखें।
- ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः 108 बार (1 माला) जाप करे|
Surya ke 12 Bhav ke Phal aur Upay | मां बगलामुखी का मंत्र | साधना जाप की सम्पूर्ण विधि, लाभ और महत्व


