पूजा के समय मन क्यों भटकता है जानिए इसके पीछे का कारण

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पूजा के समय मन क्यों भटकता है? जानिए इसके पीछे का कारण

 

क्या आप ने कभी सोचा है। पूजा के समय मन इतना क्यों भटकता है, जब आप कोई भी कार्य करते है, जैसे नौकरी, व्यापार, और घर का कोई भी कार्य करते है तब हमारे मन मे ऎसा कुछ नहि होता।

लेकिन जैसे ही पूजा के लिए बैठते हैं, अचानक से ही जाने कितनी बातें याद आने लगती हैं। कभी किसी से हुई बातचीत मन में घूमने लगती है और कभी आने वाले कल की चिंताएं होने लगती है।

ऐसे समय में कई लोगों के मन में एक सवाल आता है कि पूजा के समय ही मन इतना क्यों भटकता है? आप मे से बहुत सारे लोग इस बात से परेशान रहते है। और बहुत ज्यादा चिंतित हो‌ जाते हैं, हमारे साथ ऎसा क्यों होता है।

उन्हें लगता है कि शायद उनका मन भगवान में नहीं लगता, या फिर वे ठीक तरह से पूजा नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन हर बार ऐसा समझना सही नहीं है। मन का भटकना मनुष्यों की एक स्वभाविक प्रवृति होती है।

 

पूजा के समय मन क्यों भटकता है?

वैसे तो मन का भटकना मनुष्यों का स्वभाविक गुण होता है, किन्तु इसके अतिरिक्त पूजा मे मन के

भटकने के कुछ और कारण भी हो सकते हैं। क्योंकि की मन का स्वभाव ही होता है भटकना,

दिनभर हम कई लोगों से मिलते हैं, अलग-अलग काम करते हैं, मोबाइल देखते हैं,

बातचीत करते हैं इन सब चीजों का प्रभाव कहीं न कही हमारे मन मे रह जाता है।

और जब हम पूजा के लिए मन को शांत करके बैठते हैं, वही विचार सामने आने लगते हैं।

 

पूजा मे मन भटकने के विशेष कारण

 

मन मे चल रहे विचार

जो बाते आप‌ दिनभर मे सोचते है, उसी के विचार पूजा के समय आपके मन में घुमते रहते हैं।

 

तनाव और चिंता

जब आप किसी भी बात को लेकर बहुत ज्यादा चिंता मे रहते है। या किसी भी कारण से

आप तनाव मे होते हैं। तो पूजा मे मन‌ लगना बहुत मुश्किल हो जाता है।

 

बीते समय या भविष्य की चिंता

कभी-कभी क्या होता है बीते समय मे आपके साथ कुछ ऎसी बुरी चीजें हो‌ जाती है।

जिसकी वजह से हमे आने वाले भविष्य की बहुत ज्यादा चिंता सताने लगती है।

और पूजा से हमारा ध्यान भटक जाता है।

 

मन की एकाग्रता

आप मे से कई लोग ऎसे भी होंगे जिन्होंने कभी भी ध्यान नही किया होता। और मन को एकाग्र

करना भी नही जानते होंगे। इसी कारण आप मन को लम्बे समय तक पूजा मे नही टिका पाते।

 

पूजा को सिर्फ ड्यूटी समझना

यदि आप पूजा-पाठ को सिर्फ अपनी एक ड्यूटी समझते है।

आपको भगवान पर विशवास नही दीपक जलाना और जल्दबाजी मे पूजा करना।

 

श्रद्धा-विशवास न होना

जब भी पूजा करते हैं सबसे महत्वपूर्ण होता है। श्राद्ध और विशवास अगर आप मे इसकी कमी है

तो भी आपका मन पूजा-पाठ या फिर ध्यान मे नही लगता।

 

शरीर अस्वस्थ और थकान

अगर आपका का शरीर अस्वस्थ है आप बहुत थकावट महसूस करते हैं।

इसे भी पूजा के दौरान मन को एकाग्र करना मुश्किल होता हलगता

 

अधिकांश इच्छाएं

कई लोगों के मन मे बहुत ज्यादा इच्छाएं और अपेक्षाएं होती है।

जिसके कारण मन स्थित नही रहता और एकाग्रता भंग हो जाती है।

फिर पूजा-पाठ मे मन नही लगता।

 

डिजिटल चीजों की बुरी आदतें

यह बात तो आपको भी ज्ञात है मोबाइल, टीवी,  कम्प्यूटर जैसी चीजों की अगर बहुत ज्यादा आदत हो

तो फिर पूजा-पाठ मे मन लगाना बहुत ज्यादा कठिन हो जाता है।

 

आसपास का वातावरण

अगर आपके आसपास बहुत ज्यादा शोर हो, या टीवी, मोबाइल या

फिर बातचीत की आवाज हो तो भी पूजा मे मन भटकने लगता है।

 

क्या पूजा मे मन का भटकना गलत माना जाता है?

पूजा के समय मन का भटकना गलत या असफलता नही है।

जैसे कि मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ। मनुष्यों का मन बहुत चंचल हैं

उसका भटकना स्वाभाविक है। मन को एक ही जगह एकाग्र रखना बहुत कठिन होता है।

 

ब्राह्मण और गुरुजनो का दृष्टिकोण

पंडितो, ब्राह्मणों और गुरजनो का कहना है। कि मनुष्यों की अपेक्षाएं बहुत हैं एक समाप्त होती है

दूसरी मन मे आनी शुरू हो‌ जाती। इन्हीं इच्छाओं और अपेक्षाओ के चलते मन एकाग्र नही रहता।

और मन बहुत चंचल होता है इसे स्थिर रखना बहुत मुश्किल है। मन को स्थिर रखने के लिए ध्यान

और योग अभ्यास करना पड़ता है।

 

सनातन धर्म के अनुसार

सनातन धर्म के अनुसार मनुष्यों के मन की बहुत सारी अवस्थाएँ होती है।

जिस पर मनुष्यों का स्वाभ निर्भर करता है।

जैसे कीक्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र, निरुद्ध, शांत, प्रसन्न, ध्यानस्थ, समाहित, समत्व अवस्था।

पर यह आपको सीधे समझ नही आयेंगे, इसलिए मैं आपको नीचे सरल भाषा मे बता रहा हूँ।

 

शांत मन

मन मे किसी तरह के विचार न होकर मन बिल्कुल शांत होता है। इसे कहते हैं

शांत मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन बहुत कम भटकता है।

 

चंचल मन

जब मन एक जगह स्थिर नहीं रहकर, अलग अलग विचारों की ओर जाता है।

उसे कहते है चंचल मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों जा पूजा मे मन भटकना स्वाभाविक है।

चंचल मन को स्थिर और एकाग्र करने के लिए अभ्यास करना पड़ता है।

 

स्थिर ( एकाग्र ) मन

इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन बहुत स्थिर होता हैं। जब मनुष्य अपने मन को एक ही कार्य

और विचारों मे स्थिर रखता है। उसे कहते हैं स्थिर (एकाग्र) मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों का

भी पूजा और ध्यान मे मन नहीं भटकता

 

उदास मन

जब मनुष्यों का मन किसी भी कारणों से बहुत दुखी और उदास होता है।

उसे कहते हैं उदास मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन पूजा मे नही लगता।

 

क्रोधित मन

क्रोध मनुष्यों का सबसे बड़ा शत्रु होता है। हो विवेक और सोचने समझने की शक्ति को भी हर लेता है।

जो भी मनुष्य क्रोधित मन के अधीन होते है उनका भी मन स्थिर नही रहता और न ही पूजा-पाठ मे लगता।

 

भयभीत मन

जब आपके मन मे किसी भी बात को लेकर हमेशा डर लगा रहता है। उसे कहते हैं।

भयभीत मन, चाहे डर किसी भी बात से हो जैसे भविष्य, व्यापार, नौकरी या फिर परिवार।

इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन पूजा मे नही लगता।

 

लोभी मन

मनुष्यों के मन मे जब धन और किसी भी वस्तु के लिए इच्छाएं बढ़ जाती है।

उस कहते हैं लोभी मन, इस अवस्था मे मन एकाग्र नही हो सकता।

 

मोह से ग्रसित मन

जब आपका किसी भी व्यक्ति या वस्तु को लेकर बहुत ज्यादा लगाव हो, उसे कहते हैं

मोहग्रस्त मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन भी एक जगह स्थिर नही रहता और भटकता रहता है।

 

संतुष्ट मन

आपके मन मे जब ज्यादा इच्छाएं नही होती। और ना ही किसी से कोई शिकायतें रहती।

इस अवस्था को कहते है संतुष्ट मन।

 

सकारात्मक (Positive) मन

जो भी मनुष्य हर स्थितियों मे सकारात्मक (Positive) रहता है।

उस अवस्था को कहते हैं सकारात्मक मन।

 

नकारात्मक (Negative) मन

जब मनुष्य हर विचार और स्थितियों मे (Negative) रहता है। उस अवस्था को कहते है

नकारात्मक मन, इस अवस्था वाले मनुष्यों का मन पूजा-पाठ और ध्यान मे कभी नही लगता।

 

पूजा के समय मन भटके तो क्या करें?

  • पूजा शुरू करने से पहले आराम से बैठकर मन जो एकाग्र और शांत करे।
  • मोबाइल और अन्य किसी भी प्रकार डिजिटल चीजों को दूर रखे।
  • लम्बे समय के लिए पूजा और ध्यान करने की जगह कम समय के लिए करे।
  • अपने इष्ट के स्वरुप पर ध्यान लगाकर उनके मंत्र का जाप करे, और मन को एक जगह केंद्रित करे।
  • ध्यान या पूजा जे समय जाप किये जाने वाले मंत्र का सही उचारण करे। मंत्र के एक-एक शब्द पर ध्यान केंद्रित करें।
  • अगर आप किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या फिर ध्यान करते है। उसमे जल्दबाजी नही करनी चाहिए। पूजा पाठ हमेशा आराम और शांत मन के साथ करना चाहिए।
  • पूजा-पाठ और ध्यान हमेशा शांत वातावरण वाले स्थान पर करना चाहिए। अगर आपके पास ऎसा स्थान ना हो तो कमरे का दरवाजा बंद करके भी कर सकते है।
  • कोई भी पूजा-पाठ, साधना और हवन आदि करने से पहले गणेश वंदना, गुरू की पूजा-ध्यान, कुल देवी देवताओं और पित्तरो का भी नाम लेना आवश्यक है। यदि आपका कोई भी गुरु नही तो कोई बात नही, जो है उनका ही नाम ले लेना चाहिए।

इस बात पर विशेष ध्यान दें।

पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान आदि मे मन का भटकना ये नही साबित करता की आपके विशवास मे कमी है। या भगवान आपसे प्रसन्न नही। मन भटकना तो बस एक मन की अवस्था है। इस बात से आपको ज्यादा चिंतित नहिउ होना चाहिए। बस आपको जो बताया है उसे करने का प्रयास करें

 

डिसक्लेमर

इस लेख मे दी गई जानकारी ग्रंथों और सनातन धर्म के अनुसार है। इसकी मंत्रमोल पुष्टि नही करता

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