गणेश जी की आरती कैसे करें जानिए आरती का अर्थ, विधि और सामग्री

गणेश जी की आरती कैसे करें?  जानिए आरती का अर्थ, विधि और सामग्री

गणेश जी की आरती कैसे करें: यह सवाल आपके मन मे बहुत बार आता होगा। आरती क्या होती है, ये क्यो की जाती है, आरती करने से क्या होता है। यही प्रश्न गणेश भक्तों के मन मे भी आता होगा, आज हम इसी के बारे मे बात करेंगे। की गणेश भगवान जी की आरती कैसे करे, आरती का अर्थ, विधि और सामग्री

 

श्री गणेश जी का परिचय

भगवान गणेश जी के पिता महादेव (शिव), माता पार्वती है।

इनका मुख्य नाम गणेश जी है, अन्य नाम एकदंत, विध्नहरता, विनायक,

लम्बोदर, सुमुख, और गजानन इसके अतिरिक्त भी इनके बहुत सारे नाम है।

श्री गणेश भगवान जी हमारे हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता है, इन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है।

सभी देवी-देवताओं की पूजा के पहले गणेश भगवान की पूजा की जाती है।

अगर कोई भी पूजा-पाठ करने से पहले गणेश भगवान की पूजा नही की जाती

तो पूजा कभी भी सफल नही होती। इस बात को हमारी धार्मिक ग्रंथों मे भी लिखा गया है।

 

आरती क्या होती हैं

आरती शब्द संस्कृत के आरत्रिका शब्द से बना है। आरत्रिका (आरती) का अर्थ है

संध्या के समय दिपक जलाना और दीपक जो रात्रि के अंधकार को दूर करे।

आरती हमारे सनातन धर्म की पूजा की महत्वपूर्ण क्रिया है। जिसमें एक थाली मे दीपक,

अगरबत्ती या धूप, कपूर, और फूल लेकर देवी-देवताओं के सामने सिर झुकाकर श्रद्धा से घुमाया जाता।

 

क्यों कि जाती है आरती

आरती हमेशा पूजा-पाठ, जाप, और हवन आदि की समाप्ति के बाद की जाती है।

देवी-देवताओं के सम्मान मे सिर को झुकाकर पूजा की थाली को घुमाया जाता है।

ये करने से देवी-देवताओं के प्रति हमारी श्राद्ध और भक्ति झलकती है।

प्रत्येक पूजा की समाप्ति के बाद आरती की जाती है। क्योंकि आरती करना बहुत जरुरी होता है।

आरती से हम अपने भगवान को प्रेम और श्रद्धा से विदा करते है और

उनसे अपने घर की सुख शांति के लिए प्रार्थना करते है।

 

आरती करने से क्या होता है

  • घर मे सुख शांति बनी रहती है
  • भगवान की कृपा सदा बनी रहती है।
  • मन मे हमेशा स्थिर और शांत रहता है
  • परिवार के साथ आरती करने से पूरे परिवार भगवान की कृपा बनी रहती है।
  • घर मे हमेशा सकारात्मक उर्जा बनी रहती है।
  • इष्ट देव का घर मे वास सदा रहता है।

 

गणेश आरती की विधि

सर्वप्रथम आप नहा कर साफ सुथरे कपड़े पहन कर अपने परिवार सहित घर के मंदिर मे आ जाए।

उसके बाद एक थाली लेकर उसने घी या तेल का दिपक, धूप, कपूर और फूल रखकर थाली तैयार करें।

दीपक और कपूर को जला ले और अपने परिवार के साथ आरती आरम्भ करें।

आरती करते समय घंटी भी बजाते रहे, अगर आपके पास घंटी नही तो कोई बात नही आप ऎसे ही आरती करें।

 

आरती के लिए सामग्री

वैसे तो गणेश भगवान की आरती के लिए कुछ ज्यादा चीजों की जरुरत नही होती।

उनकी आरती के लिए जिन्ह भी चीजों की जरुरत होती हैं घर मे बड़ी आसानी से मिल जाती है। जैसे की –

  • थाली
  • दीपक
  • धूप या अगरबत्ती
  • घी या तिल का तेल
  • रूई या मौली की बाती
  • कपूर
  • घंटी

गणेश जी की आरती कैसे करें 

 

भगवान गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥

 

Ganesh Ji Ki Aarti

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

EK DANT DAYAVANT CHAR BHUJA DHARI.
MATHE SINDOOR SOHE MUSE KI SAWARI ॥

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

HAAR CHADHE PHOOL CHADHE AUR CHADHE MEVA.
LADDUAN KA BHOG LAGE SANT KAREN SEVA ॥

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

ANDHAN KO AANKH DET KODHIN KO KAYA.
BANJHAN KO PUTRA DET NIRDHAN KO MAYA ॥

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

SOOR SHYAM SHARAN AAYE SAFAL KIJE SEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

DEENAN KI LAAJ RAKHO SHAMBHU SUTKARI.
KAMNA KO PURNA KARO JAAUN BALIHARI ॥

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA.
MATA JAKI PARVATI PITA MAHADEVA ॥

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