हनुमान जी की साधना कैसे करें? जानिए मंत्र, विधि और सामग्री
हनुमान जी हमारे हिन्दू धर्म के बहुत ही विशेष और महत्वपूर्ण देवता है। और इन्हे प्रमुख देवी-देवताओं मे स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म मे हनुमान जी को शक्ति, साहस, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उन्हें भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्र अवतार और श्री राम का परम भक्त कहा जाता है। हनुमान जी की कृपा हर कोई प्राप्त करना चाहता है। आप मे से बहुत लोग उनकी कृपा प्राप्त करना चाहते होंगे और ये भी जानना चाहते होंगे की “हनुमान जी की साधना” कैसे करें, आज की पोस्ट हम आपको ये बताने वाले हैं। कि हनुमान जी की साधना कैसे करें, साधना की विधि, मंत्र, सामग्री और पूजा के नियम।
भगवान हनुमान जी का परिचय
धार्मिक ग्रंथो के अनुसार हनुमान जी का जन्म पवन देव की कृपा से किष्किन्धा नगरी मे हुआ था।
उन्हें हनुमान, बजरंगबली, पवन पुत्र, मारुति और संकटमोचन कई नामो से जाना जाता है।
धर्म पिता: पवन देव
पिता: केसरी
माता: अंजनी
भाई: मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान।
यंत्र स्थापना
सर्वप्रथम प्राण प्रतिष्ठित ‘हनुमान यंत्र’ को प्राप्त कर लें, किसी मंगलवार की रात्रि में स्वयं स्नान कर
लाल रंग का शुद्ध वस्त्र पहन हनुमान यंत्र को लकड़ी के चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर
सिन्दूर छिड़क कर स्थापित कर दें। आप ये साधना बिना यंत्र के भी कर सकते हैं।
यंत्र पूजन की विधि
- पहले गुरु ध्यान कर वीर मुद्रा में बैठ कर घी का दीपक जलायें
- सामने स्थापित हनुमान यंत्र को स्नान करा कर उस पर तेल मिश्रित सिन्दूर का लेपन करें, स्वयं भी सिन्दूर का तिलक करें।
- लाल पुष्प और कोई भी फल नैवेद्य रूप में समर्पित करें।
- उसके बाद मंत्र सिद्ध ‘मूंगा माला’ से हनुमान मंत्र का 21 माला मंत्र जप करें। मूंगा की माला नही हो तो रुद्राक्ष की इस्तेमाल करें।
- रोज पूजा समाप्ति के पश्चात राम नाम का जाप और आरती अवश्य करें।

मंत्र
ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय हनुमते नमः
हनुमान जी की साधना विधि
- भगवान हनुमान जी की साधना किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार और शनिवार से शुरू कर सकते हैं।
- इसके अतिरिक्त हनुमान जयंती, नवरात्रि और श्रावन के महीने भी आरम्भ कर सकते हैं।
- यह साधना आप 11, 21, 31, 41 दिनो तक कर सकते हैं। सुबह-शाम 11-11 माल जाप करे।
- साधना आरम्भ करने से पहले साधना स्थल की साफ सफाई कर लेनी चाहिए।
अगर आप चाहे तो दरबार की सजावट भी कर सकते है। - पूजा के प्रथम दिन सुबह नहा कर शुद्ध वस्त्र डाले।
- लकड़ी की चौकी स्थापित करके लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा ले।
- हनुमान जी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें
- एक थाली लेकर उसमे देसी घी का दिपक और धूप रखे।
- भगवान हनुमान को सिंदूर का तिलक करके दिपक जलाकर हनुमान जी का आह्वान करें।
- उसके पश्चात संकल्प लेकर गुरु की पूजा और ध्यान करे।
- अपने कुल के देवी-देवताओं और पित्तर देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करें।
- उसके पश्चात आप साधना आरम्भ कर सकते है, रोज की साधना समाप्ति के पश्चात आरती अवश्य करें।
साधना का समय
- सुबह 4:00 बजे से लेकर सुबह 11:00 बजे तक।
- शाम 7:00 बजे से लेकर रात्रि 11:00 बजे तक।
हनुमान साधना की सामग्री
- लाल रंग के पुष्प जैसे की गुलाब, कमल और गुड़हल आदि।
- नैवेद्य में प्रातः पूजन में गुड़, लड्डू, व बूंदी।
- दोपहर में गुड़, घी और गेहूं की रोटी का चूरमा।
- रात्रि में कोई भी फल आम, अमरूद या केले नैवेद्य आदि। अगर आपका समर्थ तीन
समय भोग देने का नही तो एक समय दे सकते हैं। जैसे की लड्डू और बूंदी मे से कुछ भी - देसी घी और तिल के तेल का दीपक।
- हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा।
- लकड़ी की चौकी और लाल रंग का कपड़ा ।
- स्वयं के लिये आसन।
- लौंग, इलायची, सुपारी और पान।
- गुलाब का खुशबूदार इत्र।
- पानी का कलश व नारियल ।
- हनुमान जी का परना सवा 2 मीटर।
- सवा 2 मीटर का लंगोट
- जनेऊ का जोड़ा।
साधना के नियम
- हनुमान साधना में शुद्धता अनिवार्य है
- पूर्ण साधना काल में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन अवश्य ही करें।
- मंत्र जप करते समय दृष्टि सदैव यंत्र पर ही टिकी रहे।
- किसी भी इस्त्री पर बुरी दृष्टि नही डालनी चाहिए।
- माता-पिता के रोज चरण स्पर्श करे।
- मांस मदिरा वह इसका सेवन करने वालो से दूर रहे।
- साधना काल मे घर मे प्याज लहसुन का इस्तेमाल ना करे।
- अभद्र भाषा का इस्तेमाल न करें।
- साधना के समय घर पर रहने का प्रयास करे, ज्यादा मजबूरी हो तो जा सकते है।
- साधना काल मे बाल न कटवाए।
- रोज की साधना समाप्ति के बाद पूजा स्थल के पास धरती पर ही शयन करे।
अगर संभव हो सके तो साधना के दौरान ज्यादा से ज्यादा मौन रहने का का प्रयास करें
तथा साधना को भी गोपनीय ही रखें। पूर्ण एकानिष्ठ भाव व विश्वास के साथ साधना सम्पन्न करें।

हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥



