आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें? जानें सही तरीका

आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें? जानें सही तरीका

 

हमारे हिन्दू धर्म मे देवी-देवताओं,  के सामने सुबह-शाम दीपक जलाने के धार्मिक परम्परा है।
इसके अतिरिक्त इष्ट देवता और कुल देवी-देवताओं की पूजा-पाठ एवं आरती के समय भी
दिपक जलाया जाता है। ऎसे मे कई लोगों के मन मे ये सवाल आता है कि पूजा और आरती के
बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें? इसे फेकना चाहिए, या फिर जल मे प्रवाहित करना चाहिए।
आज हम इन्हीं प्रश्नों पर चर्चा करेंगे और जानेगे इसका सही तरिका।

आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें?

वैसे तो इस विषय पर अलग-अलग परिवारों की अलग-अलग परम्पराएं और नियम हैं।

कुछ लोगों के विचार इस विषय पर हमसे अलग भी हो सकते हैं।

हम यह नही कहते कि आप सिर्फ हमारे द्वारा दी गई जानकारी पर ही विशवास करे।

आप अपने गुरु और कुल पुरोहित की दी गई जानकारी अनुसार भी चल सकते है

दीपक मे जली बाती को तुरंत ना हटाए

  • हमें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए, कि कभी भी दीपक मे जली हुई बाती को तुरंत नही हटाना चाहिए।
  • क्योंकि जलते दीपक ( ज्योत ) पर देवी-देवताओं का वास माना जाता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि देवी-देवता दीपक की जलती बाती से सामग्री ग्रहण करते है।
    इसलिए हमे जलते दीपक के साथ छेड़छाड़ नही करनी चाहिए और न ही उसके ऊपर हाथ फेरना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त ये भी कारण होता हैं तुरंत बाती न हटाने का कहा जाता है
  • दीपक के बुझ जाने के बाद भी 2-3 घंटे देवी देवताओं का वास माना जाता है।

आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें?

 

आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें? जानें सही तरीका

 

कूड़े मे फेंके या नहीं

  • सबसे पहले हमे इस बात को हमेशा ध्यान मे रखना चाहिए। हमे पूजा-पाठ, हवन, दीपक और अगरबत्ती
    या फिर पूजा की कोई भी सामग्री हो उसे कूड़े मे कभी भी नही फेकना चाहिए,
  • इसे देवी देवताओं का अपमान माना जाता है।
  • इसलिए हमे आरती या पूजा के दीपक की बाती को कूड़े मे न फेंक कर अलग से किसी पात्र मे
    संभाल के रख लेना चाहिए।
  • लेकिन हां हमे इन्ह बातो से डरना नही चाहिए,  अगर गलती से आपसे पूजा की
    सामग्री कूड़े मे फेंकी गई हो।

बची हुई बाती का क्या करें

  • रोज सुबह-शाम पूजा, आरती के बाद दीपक की बची बाती को किसी डिब्बे या पात्र मे रख सकते है
  • दीपक की बची बाती को इकट्ठा करके जलाकर राख बनाकर पौधों मे डाल सकते है।
  • इसके अतिरिक्त आप आरती के दीपक की बची बाती को घर के बगीचे मे गड्ढा खोदकर उसमे दबा सकते हैं।

क्या बची बाती को नदी मे डालना चाहिए

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ वह हवन की सामग्री को नदी मे बहान उचित माना जाता है।
  • लेकिन हमे जल प्रदूषण का भी ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कुछ लोग प्लास्टिक, पन्नी, सजावट की सामग्री
    को भी नदी मे बहाते है जो बहुत गलत है, हमे इन बातो से बचना चाहिए।

आरती के बाद दीपक में बची हुई बाती का क्या करें? जानें सही तरीका

 

दीपक मे बचे घी का क्या करें

  • पूजा, आरती के बाद कई बार दीपक का घी बच जाता है। हमे उसे फेकना नही चाहिए,
    उसका फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। हां अगर घी साफ ना रहे थोड़ा काला पड़ जाये,
  • तो फिर उसका दोबारा इस्तेमाल नही करना चाहिए। लेकिन आपको इस बात का भी ध्यान
    रखना हैं, घी आपको नाली मे नही फेकना चाहिए।

क्या बची बाती को फिर इस्तेमाल करना चाहिए

  • हां हम बची हुई आरती या पूजा की बाती को फिर इस्तेमाल कर सकते है। कई लोग क्या करते है,
  • मौली की लम्बी बाती बना लेते है, और उसका बार-बार इस्तमाल करते रहते हैं।
  • लेकिन बची हुई  बाती का भी आपको 3-4 दिनों से ज्यादा इस्तमाल नहीं  करना चाहिए।
  • अगर आप बाती रुई से बनाते है,  उसका आप बार-बार इस्तमाल नही कर सकते।
  • वैसे तो इस्तमाल किया जा सकता है, किंतु रूई की बाती एक बार इस्तमाल के बाद खराब हो जाती है।
  • आपको एक बात का और विषेश ध्यान रखना है। बची बाती का इस्तमाल सिर्फ घर मे लगने बाली ज्योत मे ही करना चाहिए।
  • किसि विशेष पूजा मे ऎसा नही कर सकते, उस समय आपको नई बाती का ही इस्तमाल करना चाहिए।

दीपक की बची बाती को लेकर धार्मिक मान्यताएँ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव कार्य और पूजा मे एक बार की इस्तमाल की गई सामग्री फिर इस्तमाल
नही करना चाहिए।

किंतु कुछ लोगों इस बात को लेकर अलग विचार है। उनका कहना है देवी देवताओं के लिए सच्ची श्रद्धा,
भावना और प्रेम से बढ़ कर कुछ नही है।

परंतु कुछ विद्वान पंडितों और शात्रीयों का कहना है। पूजा-पाठ को पूरे नियम और विधि विधान से करना चाहिए।

इसमे कोई भी त्रुटियाँ नहीं होनी चाहिए। पर इस बात मे हमारा मानना भी यह है कि जो विशेष पूजा होती है,

उसमे हमे इस्तमाल की सामग्री इस्तमाल नही करनी चाहिए।

किंतु घर लगने वाली रोज ज्योत ( दीपक ) मे आप फिर पुरानी बाती का इस्तमाल कर सकते है।

विशेष पूजा जैसे कि :-

  • हवन, नवग्रह पूजा व हवन, काल सर्प एवं मांगलिक दोष जैसे पूजा-पाठ, कोई साधना,
  • भागवत पुराण, दुर्गा सप्तशती, भागवत गीता, विष्णु पुराण एवं सहस्त्र नामावली,
  • हरी वंश पुराण इनके अतिरिक्त कोई भी विशेष पूजा।

पूछे जाने वाले प्रशन

  • पूजा के बाद जली हुई बाती का क्या करें।
  • क्या जली हुई बाती का फिर से इस्तमाल कर सकते है।
  • क्या दीपक की बची हुई बाती को नदी मे प्रवाहित कर सकते है।
  • दीपक मे बचे हुए तेल या घी का क्या करें।

 

इसे जरूर पढ़े – इन सब प्रशनो के उत्तर उपर पढ़े।

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