Hanuman chalisa arth sahit || हिन्दी में अर्थ सहित और सिद्धि

हनुमान चालीसा हिन्दी अर्थ सहित। हनुमान चालीसा सिद्ध करने की विधि। Hanuman chalisa arth sahit

 

Hanuman chalisa arth sahit, हिन्दी में अर्थ सहित और सिद्धि

 

हनुमान चालीसा अर्थ सहित 

पाठकों आज हम आपको ” Hanuman chalisa arth sahit “, हिन्दी मे अनुवाद सहित। क्योंकि मित्रों कोई भी पाठ पूजा से पहले हमे उनका अर्थ ज्ञात होना चाहिए। अन्यथा आपको पाठ पूजा का पूर्ण फल‌ प्राप्त नही होता। इसके अतिरिक्त आप कोई‌ भी मंत्र साधना या पाठ करते हैं। हमे उसका‌ अर्थ ज्ञात होना चाहिए। इसलिए आज हम आपको हनुमान चालीसा अर्थ सहित बता रहे है। ताकि आपका हनुमान चालीसा का पाठ पूर्ण फल प्रदान करें।

हनुमान चालीसा का निर्माण

पाठकों हनुमान चालीसा का निर्माण गौरी पत्ति भगवान शंकर ने किया था। वैसे तो हनुमान जी भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र अवतार थे। इनका जन्म वानर कुल मे हुआ था। भगवान शंकर ने लोक कल्याण हेतु ही हनुमान चालीस का निर्माण किया था। क्योंकि वीर हनुमान 8 सिद्धि 9 निधि के दाता थे। वह संकट मोचन थे। उन्होंने श्री राम चंद्र जी के अनेको काज पूर्ण किये थे। वीर हनुमान जी मे  लोक कल्याण करने का पूरा समर्थन था। इसलिए भगवान शंकर जी ने हनुमान चालीसा का निर्माण किया था। ताकि इसका पाठ करके। लोक‌ कल्याण हो।

हनुमान चालीसा का महत्व

पाठकों श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने से। सम्पूर्ण भयो का नाश होता है। मित्रों आपको हर क्षेत्र मे सफलता प्राप्त होगीं। घर मे सदैव सुख शांति बनी रहेगी। किसी भी तरह का किया-कराया, भूत-प्रेत, जिन्न-चुडैल, दीठ-मूठ, आपको देखते नष्ट हो जाएगा। और किसी भी तरह की तंत्र क्रिया आप पर असर नही करेगी। यदि आप अपने घर मे धूप-दीप लगाकर। 41 दिनो तक नियमित रूप से प्रतिदिन हनुमान चालीका का पाठ करता है। वह व्यक्ति हनुमान की कृपा प्राप्त कर लेता है। उसके जीवन पर कभी कोई संकट नही आता।

हनुमान चालीसा की सिद्धि

साधकों आप चाहे तो हनुमान चालीसा की सिद्धि प्राप्त कर सकते है। अगर आप हनुमान चालीसा को सिद्ध कर लेते है। तो आपके सर्व कार्य पूर्ण होंगे। सम्पूर्ण भयो का नाश होगा। आपकी सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होगीं। आपका शरीर भी‌ सिद्ध हो जाएगा। आप संसार के सभी बंधनो से छुटकारा पा लेंगे।

Hanuman chalisa arth sahit, हिन्दी में अर्थ सहित और सिद्धि

हनुमान चालीसा हिन्दी अनुवाद सहित 1

॥दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

अर्थ – श्री गुरू महाराज जी के चरण कमलों की धूली से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ। जो चारों फ़ल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है|

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

अर्थ –  पवनकुमार, मैं अपने को शरीर और बुद्धि से हीं जान कर आपका ध्यान कर रहा हूँ| आप मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एंव विध्या देकर मेरे दु:खों व दोषों का नाश करने की कृपा कीजिए।

॥चौपाई॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

अर्थ – हे हनुमान जी! आपकी जय हो। आप ज्ञान और गुण के सागर हैं। तीनों लोकों में यह बात उजागर है। कि आप कपीश्वर (वानरों में सर्वश्रेष्ठ) हैं। आपकी जय हो।

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

अर्थ – माता अंजनी के पुत्र, पवनपुत्र नाम से विख्यात हे रामदूत। आप अतुलनीय बल के भण्डार हो।

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

अर्थ – महान पराक्रमवाले, हे महावीर बजरंगबली। आप दुर्बुद्धि का निवारण करके सद्बुद्धि प्रदान करते हो अर्थात् अच्छे विचारवालों के सहायक होते है।

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

अर्थ – आपका शरीर सुनहरे रंग का और वेशभूषा बहुत ही सुन्दर है। आपके बाल घुँघराले हैं और कानों में कुण्डल हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

अर्थ – आपके हाथ में वज्र और ध्वजा विराजमान है। आपके काँधे पर मूँज से बना यज्ञोपवीत (जनेऊ) शोभायमान हो रहा है।

Hanuman chalisa arth sahit 2

शंकर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

अर्थ – शंकर भगवान के अवतार, हे केसरी नन्दन! आप अपने तेज और पराक्रम से सारे संसार में परम वन्दनीय हैं।

विद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिवे को आतुर ॥७॥

अर्थ – आप विद्यावान और गुण के निधान हैं। अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

अर्थ – प्रभु श्रीराम का चरित्रगान सुनने में आप आनन्द रस लेते हैं। श्रीराम, सीता और लखन आपके हृदय में बसते हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
विकट रूप धरि लंक जरावा ॥९॥

अर्थ – आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीताजी को दिखलाया और भयंकर रूप धारण करके लंका को जलाया था।

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

अर्थ – आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा था। और श्री रामचन्द्र जी के कार्य को सफल बनाया था।

लाय संजीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥

अर्थ – आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मणजी को जीवित किया, जिस कारण श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

अर्थ – रघुपति श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे लिये मेरे भाई भरत के समान प्रिय हो।

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

अर्थ – तुम्हारा यश हज़ार मुख से सराहनीय है, यह कहकर सियापति राम ने आपको गले से लगा लिया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

अर्थ – सनकादिक ऋषि (सनक, सनातन, सनन्दन, सनत्कुमार चारों ऋषि), ब्रह्मा आदि देवता, मुनिगण, नारदजी, माता सरस्वती सहित शेषनाग भी आपका गुणगान करते हैं।

Hanuman chalisa arth sahit, हिन्दी में अर्थ सहित और सिद्धि

Hanuman chalisa arth sahit 3

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

अर्थ – यमराज, कुबेर, सब दिशाओं के रक्षक, कवि, विद्वान, पण्डित या कोई भी आपके यश का पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

अर्थ – आपने सुग्रीव को श्रीराम से मिलवाकर, सुग्रीव पर उपकार किया और उन्हें राजपद दिलवाया।

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥१७॥

अर्थ – विभीषणजी ने आपके उपदेश का पालन किया, जिससे वे लंका के राजा बने, यह सारा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

अर्थ – कई हज़ार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

अर्थ – प्रभु श्री रामचन्द्र जी की अँगूठी मुँख में रखकर। समुद्र को लाँघ गये, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

अर्थ – संसार मे जितने भी कठिन-से-कठिन काम हैं, वे आपकी कृपा से सहज ही हो जाते हैं।

Hanuman chalisa arth sahit 4

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

अर्थ – भगवान श्रीराम द्वार के आप
रखवाले हैं, जिस द्वार पर आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता।

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

अर्थ – आपकी शरण में सब सुख सुलभ हैं, जब आप रक्षक हैं तब किससे डरने की जरुरत है॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

अर्थ – अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं, तीनों लोक आपकी ललकार से काँपते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

अर्थ – केवल आपका नाम सुनकर ही भूत और पिशाच पास नहीं आते हैं॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

अर्थ – महावीर श्री हनुमान जी का निरंतर नाम जप करने से रोगों का नाश होता है और वे सारी पीड़ा को नष्ट कर देते हैं।

संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

अर्थ – जो श्री हनुमान जी का मन, कर्म और वचन से स्मरण करता है, वे उसकी सभी संकटों से रक्षा करते हैं॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

अर्थ – सबसे पर, श्रीराम तपस्वी राजा हैं, आप उनके सभी कार्य बना देते हैं।

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

अर्थ – उनसे कोई भी इच्छा रखने वाले, सभी लोग अनंत जीवन का फल प्राप्त करते हैं।

चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

अर्थ – आपका प्रताप चारों युगों में विद्यमान रहता है, आपका प्रकाश सारे जगत में प्रसिद्ध है।

Hanuman chalisa arth sahit 5

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

अर्थ – आप साधु- संतों की रक्षा करने वाले, असुरों का विनाश करने वाले और श्रीराम के प्रिय हैं।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

अर्थ – आप आठ सिद्धि और नौ निधियों के देने वाले हैं, आपको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है।

राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

अर्थ – आपके पास श्रीराम नाम का रसायन है, आप सदा श्रीराम के सेवक बने रहें।

तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

अर्थ – आपके स्मरण से जन्म- जन्मान्तर के दुःख भूल कर भक्त श्रीराम को प्राप्त करता है |

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

अर्थ – अंतिम समय में श्रीराम धाम (वैकुण्ठ) में जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरि का भक्त कहलाता है।

Madanan Mata Sadhana ।। मदानन माता साधना।

Hanuman chalisa arth sahit 6

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥

अर्थ – दूसरे देवताओं को मन में न रखते हुए, श्री हनुमान से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है।

संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

अर्थ – जो महावीर श्रीहनुमान जी का नाम स्मरण करता है, उसके संकटों का नाश हो जाता है और सारी पीड़ा ख़त्म हो जाती है॥

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जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

अर्थ – भक्तों की रक्षा करने वाले श्री हनुमान की जय हो, जय हो, जय हो, आप मुझ पर गुरु की तरह कृपा करें।

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

अर्थ – जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है वह जन्म-मृत्यु के बंधन से छूटकर महासुख को प्राप्त करता है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

अर्थ – जो इस श्री हनुमान चालीसा को पढ़ता है उसको सिद्धि प्राप्त होती है, इसके साक्षी भगवान शंकर है।

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

अर्थ – श्री तुलसीदास जी कहते हैं, मैं सदा श्रीराम का सेवक हूँ, हे स्वामी! आप मेरे हृदय में निवास कीजिये।

॥दोहा॥

पवनतनय संकट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

अर्थ – पवनपुत्र, संकटमोचन, मंगलमूर्ति श्री हनुमान आप देवताओं के ईश्वर श्रीराम, श्रीसीता जी और श्रीलक्ष्मण के साथ मेरे हृदय में निवास कीजिये।

हनुमान चालीसा को सिद्ध करने की विधि

साधकों आप हनुमान चालीसा सिद्ध करना चाहते है। तो आपको हनुमान चालीसा का 108 बार जाप करना होगा। एक लकड़ी का आसन लगा ले। या ईंटों से बना ले। उसके ऊपर लाल रंग का सवा दो मीटर कपड़ा बिछा ले। धूप व देसी घी का दिपका लगा ले। हनुमान का चित्र रख ले। राम चंद्र के साथ हो। एक पानी का कलश रख ले। पानी के कलश के ऊपर एक पानी वाला नारियल रख ले। यह सब हो जाने के पश्चात

हनुमान चालीसा सिध्दि से पूर्व

साधना आरम्भ करने से पूर्व गणेश भगवान का पूजन अवश्य करें।
2. साधना आरम्भ करने से पूर्व संकल्प करें।
3. अपने पित्तर देवता का पूजन व ध्यान करें।
4. अपने कुल देवी देवताओं का पूजन व ध्यान भी अवश्य करें।
5. नगर खेड़े का भी ध्यान करें।
6.गुरू पूजन व गुरू मंत्र का जाप करे। यदि गुरू नही है, तो भगवान शिव को गुरु मान कर साधना कर सकते हों।

साधना के नियम व परहेज

1. ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
2. अपनी पत्नी पर हाथ न उठाये व आदर करे।
3. धूम्रपान न करे और करने वालो से दूर रहे।
4. प्याज लहसुन का सेवन न करे।
5. कन्या देवियों का आदर व पूजन करे।
6. देवियों का आदर व पूजन करे।

ये मंत्र देगा आपको पद प्रमोशन मान सम्मान, व धन सम्पति

7. पर स्त्री कर साथ संबंध न बनाए
8. क्रोध न करे व अपने मन को साफ रखे।
9. किसी भी स्त्री को बुरी दृष्टि से न देखे।
10.अपने माता पिता का सम्मान करे।
11. मांस मछली व मदिरा पान से दूर रहे।
12. किसी की चुगली निंदा न करे।

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