Mutthi peer sadhna।। मुट्ठी पीर साधना, मंत्र, सामग्री और सम्पूर्ण विधि

Mutthi peer sadhna।। मुट्ठी पीर साधना

 

मुट्ठी पीर साधना के बारे मे आपने बहुत जगह सुना होगा। कई लोग इनकी अलग-अलग साधनाएं बताते है। आप मे से काफ़ी लोगों ने यह साधना करने का प्रयास भी किया होगा। किंतु आप इस साधना मे असफल रहे होंगे। इसका कारण क्या है आपका अधूरा ज्ञान साधना करने से पहले आपको साधना का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। ऐसा नही सिर्फ मंत्र लिया और साधना आरम्भ। आज हम आपको मुट्ठी पीर साधना का संपूर्ण ज्ञान देंगे। मुट्ठी पीर कौन है, इनका इतिहास क्या है, इनके माता पिता कौन है और मुट्ठी पीर साधना की विधि, मंत्र, और सामग्री इस पोस्ट को अंत तक पढे़।

 

मुट्ठी पीर बाबा कौन है?

पीर बाबा का नाम आपने इंटरनेट पर बहुत जगह सुना होगा। इनकी साधना का मंत्र और विधि भी सुनी होगी।

किंतु कही भी इनके बारे मे और कोई भी जानकारी उपलब्ध नही। मुट्ठी पीर कौन थे, इनकी कहानी क्या है,

इनका इतिहास क्या है और इनके माता पिता कौन है। इसके पीछे का कारण यह है की मुट्ठी पीर के बारे मे

किसी को भी कोई ज्ञान नही बस शाबर मंत्रो मे इनका व्याख्यान मिलता है।

 

मुट्ठी पीर साधना की संपूर्ण जानकारी?

साधना करने से पहले आपको साधना के बारे मे संपूर्ण जानकारी होनी आवश्यक है।

मुट्ठी पीर साधना की सही विधि, मंत्र और सामग्री। सबसे पहले आपको एक बात जान लेनी चाहिए।

मुट्ठी पीर साधना सिर्फ वही कर सकते है जिन्हें गुरु ज्ञान प्राप्त है। मतलब जिन्होने गुरु दीक्षा प्राप्त की हुई है।

बिना गुरु दीक्षा के यह साधना आप नही कर सकते और ना ही आपको इसका प्रयास भी करना चाहिए।

क्योंकि बिना गुरु दीक्षा के साधना करने से आपको नुकसान भी हो सकता है जिसके उत्तरदायी सिर्फ आप खुद होंगे।

आज हम आपको जो साधना बता रहे है उसके लिए सबसे पहले अपने गुरु से आज्ञा लेनी चाहिए।

 

मुट्ठी पीर साधना की विधि

दोस्तों मुट्ठी साधना की दो विधि है। हम आपको दोनो बताने वाले है।

 

पहली विधि

मुट्ठी पीर साधना आपको बबूल (किकर) वृक्ष के निचे बैठकर करनी है। आपका मुख पश्चिम की तरफ हो।

सरसो के तेल का दिपक जलाकर पांच अगरबत्ती लगाकर करनी है।

मुट्ठी पीर साधना को आप‌ शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरू कर सकते है। जप संख्या एक माला प्रतिदिन करनी है।

यह साधना आपकी एक महीने की होगी। (Mutthi peer sadhna)

 

दूसरी विधि

मुट्ठी पीर साधना आप अपने घर मे भी कर सकते है। एक साफ सुथरा कमरा देख ले।

एक लकड़ी की चौंकी रख लीजिए। अगर लकड़ी की चौंकी नही है।

तो आप ईंटों से चौंकी बना लीजिए। उसके ऊपर हरे रंग का कपड़ा बिछा लीजिए।

दोस्तों उसके बाद एक थाली ले लीजिए। और चौंकी पर रखले। उसके अंदर एक सरसो के

तेल का दिपक लगा लीजिए। फिर फल-फूल, मिठाई या बत्तासे का प्रसाद भी थाली मे चढ़ा दे।

गुलाब के सेंट का छिड़काव कर दीजिए। अपने लिए भी एक आसन लगा लीजिए।

और साधना शुरू कर सकते हो। (Mutthi peer sadhna)

 

साधना मे शीध्र सफता के लिए

दोस्तों मुट्ठी पीर साधना या फिर किसी भी साधना मे शीध्र सफला प्राप्त करने के लिए। कुछ बातो का ध्यान जरूर रखे।

  • साधना शुरू करने से पूर्व गणेश भगवान का पूजन अवश्य करें।
  • साधना से पूर्व संकल्प करें।
  • अपने पित्तर देवता का पूजन व ध्यान करें।
  • अपने कुल देवी देवताओं का पूजन व ध्यान भी अवश्य करें।
  • नगर खेड़े का भी ध्यान करें।
  • साधना करने से पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान जरूर रखे।
  • साधना शुरु करने से पहले गुरु पूजन व गुरु मंत्र का‌ जाप‌ करें।
  • दोस्तों अगर आप कोई भी साधना करना चाहते है। बिना गुरु ज्ञान के न करें।
  • आपके पास गुरु दीक्षा होनी बहुत जरूरी है।

 

Mutthi peer sadhna।। मुट्ठी पीर साधना

 

साधना का समय

यह साधना आप को किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार या शुक्रवार से आरम्भ करके

30-41 दिनों तक करनी चाहिए। 11-11 माला सुबह शाम करनी चाहिए।

समय

सुबह 4:15 से लेकर सुबह 10:00 बजे तक

शाम 7:15 बजे से लेकर रात्रि 11:00 बजे तक

 

मुट्ठी पीर साधना की सामग्री।

लकड़ी की चौकी।

सवा दो मीटर हरे रंग का कपड़ा।

एक थाली मे सरसो के तेल का दीपक।

अगरबत्ती और लौबान।

भोग के लिए लड्डू या बत्तासे।

गुलाब या चंदन का खुशबूदार ईत्र‌।

तिलक के लिए हल्की या चंदन।

आसन खुद बैठने के लिए।

मुट्ठी पीर साधना मंत्र

बिस्मिल्लाहिरहमानिरहीम! साह चक्र की बावड़ी, गले मोतियन का हार,

लंका सो कोट समुद सी खाई, जहां फिर मुहम्मदा वीर की दुहाई,

कौन वीर आगे चले, सुलेमान वीर चले, दर्शनी वीर चले,

नादिरशाह वीर चले मुट्ठी पीर चले, नहीं चले तो हजरत सुलेमान की दुहाई,

शब्द सांचा, पिण्डकांचा , फरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

 

रक्षा मंत्र

ॐ नमः वज्र का कोठा

जिसमें पिण्ड हमारा पैठा

ईश्वर की कुंजी , ब्रह्मा का ताला

मेरे आठोंयाम का यती हनुमन्त रखवाला।

 

रक्षा मंत्र सिद्ध करने की विधि

किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार को हनुमान के मंदिर मे जाकर या फिर घर मे रहकर इस मंत्र का 108 बार जाप करे।

यानी एक माला जाप करके सिद्ध कर लीजिए। इसके अतिरिक्त होली, दीपावली,

नवरात्रे, सूर्य व चंद्र ग्रहण मे 108 बार यानि एक माला जाप करके सिद्ध कर लीजिए।

अगर आप नवरात्रों ने करते है। तो आपको एक माला रोज करनी है। नौ दिनो तक।

 

रक्षा मंत्र इस्तमाल करने की विधि

दोस्तों जब भी आपको रक्षा मंत्र इस्तेमाल करना हो तो इस मंत्र को सात बार पढ़कर लोहे के चाकू पर

फूंक लगाकर अपने चारो और घेरा बना ले। और सात बार पढ़कर अपनी छाती पर भी फूंक मार ले।

ताकि पूर्ण रूप से सुरक्षा हो सके। (Mutthi peer sadhna)

 

साधना मे सफलता कैसे प्राप्त करें।

साधना में सफलता प्राप्ति के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता हैं

मुट्ठी पीर साधना के नियम व परहेज़

  • ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
  • प्याज लहसुन का सेवन न करें।
  • मांस मदिरा का सेवन न करें।
  • किसी कि चुगली निंदा न करें।
  • लड़ाई झगड़ा न करें।
  • किसी भी स्त्री को बुरी दृष्टि से न देखें।
  • माता पिता का समान करें। और आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • साधना के करते समय घर रहे, अगर ज्यादा मजबूरी हो तो बाहर जा सकते हैं
  • पहले दिन आप जिस समय भी साधना आरम्भ करते है रोज साधना का वही समय होना चाहिए।
  • साधना का समय आप बार-बार बदल नही सकते।

 

Disclaimer

यह साधना केवल धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से साझा की गई है। Mutthi peer sadhna को बिना योग्य गुरु की आज्ञा और उचित मार्गदर्शन के नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से बिना गुरु मार्गदर्शन के इस साधना को करता है, तो उसके किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम के लिए Mantramol या इस लेख के लेखक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। साधना करने का निर्णय पूरी तरह व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी पर होगा।

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