श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं जानिए जरूरी नियम और दान विधि

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श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं? जानिए जरूरी नियम और दान विधि

 

 

श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं: जब भी श्राद्ध आने वाले होते है। लोगो के मन मे कई सवाल आने लगते हैं। जैसे की श्राद्ध मे तर्पण कैसे करें, पिंडदान क्या होता है, किन वस्तुओं का दान देना चाहिए, भोजन कैसे करवाया जाता है और भोजन से जुड़े कौन से नियम ध्यान मे रखने‌ चाहिए, श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं, और किन बातों क्या ध्यान रखना चाहिए। आज हम इसी विषय पर बात करेंगे। और यह भी जानेगें की श्राद्ध को लेकर धार्मिक ग्रंथो और वेदों मे क्या लिखा गया है। आज अपके सभी प्रश्नो के उत्तर यही मिल जाएंगे।

 

श्राद्ध क्या होता हैं।

सबसे पहले आपको ये पता होना चाहिए कि श्राद्ध क्या होता है और यह क्यों किया जाता है।

सनातन धर्म और शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा शब्द से ही श्राद्ध बना है। श्राद्ध का मतलब होता है

अपने पूर्वजों एवं पित्तरो के स्मरण मे सच्ची श्रद्धा और भावना प्रकट करना। लोग उनकी

तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, दान पुण और ब्राह्मणों को भोजन करवाते हैं। ताकि उनके

पूर्वजों को शांति वह तृप्ति मिले और उनके पूर्वजों का आशीर्वाद पूरे परिवार को मिल सकें।

किंतु कुछ छेत्रो मे श्राद्ध करने का तरिका अलग भी हो सकता है। कुछ लोग सिर्फ ब्राह्मण

भोजन और दान देते है, और कुछ लोग तर्पण वह पिंडदान पर जोर देते हैं।

 

धार्मिक ग्रंथो और वेदों के अनुसार श्राद्ध

हमारे सनातन धर्म में चार भेद है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद इनमे भी

पित्तरो के वारे मे वर्णन मिलता है। इन चारों ग्रंथो मे से ऋग्वेद मे तो सबसे स्पष्ट वर्णन मिलता है। 

 

ऋग्वेद मे श्राद्ध (पित्तर पक्ष)

ऋग्वेद मे सीधे-सीधे श्राद्ध शब्द का इस्तमाल नही हुआ। पर हां पित्तर पक्ष के बारे मे वर्णन हुआ है।

पित्तरो की पूजा, तर्पण, दान और पिंडदान का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार

पित्तर पक्ष को ही श्राद्ध का नाम दिया गया है। ऋग्वेद मे और भागवत गीता मे श्रीकृष्ण भगवान

भी पित्तरो को लेकर वर्णन करते हैं।

 

भागवत गीता मे श्राद्ध

श्री भागवत गीता मे भी श्री कृष्ण और अर्जुन संवाद मे भी पित्तरो का वर्णन होता है। वहाँ भी श्राद्ध का

सिधा नाम नही आता पित्तरो के बारे मे बहुत बार सुनने मे आता है। महाभारत के युद्ध की सम्पत्ति के

पश्चात श्रीकृष्ण भगवान जी पांचों पांडवों को पित्तरो तर्पण को कहते हैं। और कर्ण के विषय मे भी कहते हैं।

क्योंकि पित्तरो और पूर्वजों की तृप्ति के लिए पिंडदान एवं तर्पण बहुत आवश्यक है।

 

श्राद्ध में क्या करना चाहिए?

अब हम जानेगें की श्राद्ध मे क्या-क्या करना चाहिए।

 

घर की साफ़ सफाई रखें।

जिस भी दिन आपको अपने पूर्वजों या पित्तरो के लिए श्राद्ध निकालना होता है। सुबह जल्दी उठकर

सबसे पहले घर की साफ़ सफाई करनी चाहिए। क्योंकि आपके पूर्वज आपके घर भोजन ग्रहण करने आते हैं।

 

स्नान करके स्वच्छता रखें

श्राद्ध करने से पहले स्नान करके स्वस्थ वस्त्र धारण करने चाहिए। क्योंकि पित्तरो और पूर्वजों

को पवित्र माना जाता है। इस लिए स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत जरुरी है।

 

मन की सफाई भी अवश्य रखें

बहुत सारे लोग ऐसे भी होते है ऊपर से नहाकर शरीर की सफाई तो कर लेते हैं। किंतु मन मे बुरे

विचार और ईर्ष्या द्वेष रखता हो। तो ऐसे मे आपका कोई भी क्रम सफल नही होता।

 

भोजन बनाते समय शुद्धता का रखे विशेष ध्यान

श्राद्धो मे पित्तरो और पूर्वजों के भोजन मे शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

क्योंकि पित्तरो और पूर्वजों को देवताओं के समान स्थान प्राप्त होता है।

 

ब्राह्मणों को भोजन और दान

सनातन धर्म मे ब्राह्मणों को भोजन करवाना और दान आदि देना को बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता हैं।

कहा जाता है की श्राद्धो मे ब्राह्मणों को भोजन करवाने से पूर्वजों को भोजन और तृप्ति की प्राप्ति होती है।

इसलिए ब्राह्मणों को भोजन और दान अवश्य देना चाहिए।

 

क्या श्राद्ध में कौए को भोजन देना जरूरी है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध मे कौए को भोजन देना बहुत अच्छा माना जाता है। कहते है

कौए को भोजन करवाने से पित्तरो को तृप्ति और शांति प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त गाय और

कुत्ते के लिए भी भोजन निकाला जाता है।

 

श्राद्ध में क्या करें और क्या नहीं

 

तर्पण और पिंडदान करें?

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार पूर्वजों और पित्तरो की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करना बहुत आवश्यक है।

इसे घर मे सुख शांति बनी रहती है। उचित ब्राह्मण के मार्ग दर्शन अनुसार तर्पण और पिंडदान अवश्य करें।

 

श्राद्ध में क्या नहीं करना चाहिए?

  • अश्रद्धा भाव और दिखावे के लिए श्राद्ध नही करने चाहिए।
  • ब्राह्मणों, साधुओं, और माता-पिता का अपमान नही करना चाहिए।
  • श्राद्ध वाले दिन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
  • उस दिन घर मे मांस, मदिरा आदि का प्रवेश वर्जित होना चाहिए।
  • घर मे शांति बनाके रखें।
  • किसी भी गरीब या मांगने वाले का अपमान नही करना चाहिए।
  • श्राद्धो के समय शुभ कार्य करने से बचना चाहिए जैसे विवाह, सगाई, मुंडन और नये व्यापार की शुरुआत
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दाढ़ी और बाल को काटने से भी बचना चाहिए।
  • नया सामना भी खरीदने से भी बचना चाहिए जैसे नये कपड़े, सोना और नये व्यापार की शुरुआत।

 

श्राद्ध के जरुरी नियम

श्राद्धो के दिनों मे कुछ ऐसे नियम है। जिनका पालन हमे अवश्य करना चाहिए।

 

पीपल को जल चढ़ाए

यह कार्य श्राद्ध के पहले दिन से आरम्भ करके अंतिम दिन अमावस्या तक करना चाहिए।

रात्रि के समय एक कलश पानी को ढककर अपने सिरहाने रख लें। और सुबह सूर्य उदय

होने से पहले पीपल की जड़ मे जल चढ़ाए और देसी घी का दीपक जलाए। पीपल के वृक्ष

के चारों और परिक्रमा करनी चाहिए। इसे पित्तरो और पूर्वजों को शांति और तृप्ति मिलती है।

अगर आपके पास पीपल वृक्ष नही तो वट वृक्ष के नीचे भी कर सकते हैं।

 

पूजा-पाठ करें

श्राद्धो के दिनों मे पूजा-पाठ करना बहुत आवश्यक है। पहले दिन से आरम्भ करने अंतिम दिन

अमावस्या तक भागवत गीता, मद्द भागवत कथा, शिव पुराण, गरुङ पुराण, श्री विष्णु पुराण

और विष्णु सहस्र नाम आदि का पाठ कर सकते हैं।

 

श्राद्ध की सही तिथि

पूर्वजों और पित्तरो की मृत्यु की तिथि अनुसार ही श्राद्ध की वही तिथि को श्राद्ध करना चाहिए ।

अगर आपको तिथि याद नही तो भूले बिसरो मे स्मरण करके अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए।

 

पंचबली भोग का नियम

श्राद्ध के दिन भोजन को पांच हिस्सों मे बांटकर गाय, कुत्ता,

कौवे, चींटी और ब्राह्मण आदि जो देना चाहिए।

 

सात्विक भोजन करें

श्राद्धो के दिनो मे घर मे सात्विक भोजन ही पकाना चाहिए। जैसे प्याज, लहसुन,

मांस-मछली आदि से दूर रहना चाहिए।

 

श्राद्ध में दान करने की विधि

वैसे तो दान करने के लिए ना तो कोई विधि होती ना ही कोई समय। दान तो हमेशा

अपनी समर्थ अनुसार ही करना चाहिए। फिर दान कैसा भी हो किसी भी वस्तु का हों।

फिर भी मैं आपको कुछ तरिके और वस्तु बता रहा हूँ। की आप किन्ह-किन्ह वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करे ब्राह्मण भोजन जे पश्चात दान करें।

 

अन्न दान

ब्राह्मणों और जरूरतमंदो को गेहूँ, चावल और दाल का दान करें।

 

फलों का दान

किसी भी भूखे, गरीब, जरुरतमंद या ब्राह्मणों को ऋतु के अनुसार फलों का दान करें।

 

वस्त्र दान

भोजन करवाने के पश्चात ब्राह्मणों को वस्त्र दान मे देने चाहिए जैसे धोती-कुर्ता, परना,

चप्पल और रुमाल। इसके अतिरिक्त आप किसी जरुरतमंद को अन्य वस्त्र भी दान कर सकते हैं।

 

काले तिल का दान

श्राद्धो में काले तिल का दान सबसे श्रेष्ट माना गया।

अपनी समर्थ के अनुसार काले तिल का दान करना चाहिए।

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