Hanuman bajrang baan siddhi || हर संकट से मुक्ति

हनुमान बजरंग बाण सिद्धि ।। Hanuman bajrang baan siddhi

 

Hanuman bajrang baan siddhi

पाठकों आज हम ” Hanuman bajrang baan siddhi ” के बारे मे बात करने वाले है ! कैसे बड़ी आसानी से हम हनुमान जी का बजरंग बाण सिद्ध कर सकते है ! और बजरंग बाण से हमे क्या लाभ प्राप्त होंगे ! यदि आप‌ बजरंग बाण सिद्ध कर लेते है। तो आपको बहुत सारे चमत्कार देखने को मिलेंगे।

बजरंग बाण परिचय ( Hanuman bajrang baan siddhi )

हनुमान बजरंग बाण का निर्माण किसने किया था। कैसे किया था। यह कोई नही जानता। किंतु बजरंग बाण हनुमान जी को बहुत प्रिय है। बजरंग बाण को हनुमान जी का ही प्रतिरुप माना गया है। यह बहुत ही शक्तिशाली है।

हनुमान बजरंग बाण के लाभ

पाठकों हनुमान बजरंग बाण पाठ के एक नही अनेकों लाभ है।

1. हनुमान जी‌ की असीम कृपा प्राप्त होती है।

2. घर मे धन सम्पत्ति की कमी नही रहती।

3. बुरी शक्ति या बुरी नज़र से घर सुरक्षित रहता है।

4. कोई भी तांत्रिक क्रिया आपके ऊपर बुरा प्रभाव नही डाल सकती। यदि आपके ऊपर पहले से ही कुछ हुआ तो वह नष्ट हो जाता है।

5. आपके सब रूके हुए कार्य पूर्ण हो जाएगें।

6. आपको लोगों से मान सम्मान प्राप्त होगां।

7. आप या आपके घर क कोई भी सदस्य बीमार रहता है। तो‌ शीध्र स्वस्थ हो जाएगा।

8. अकाल मृत्यु का भय समाप्त जो जाएगा।

9. दुर्घटनाओं से हमेशा सुरक्षित रहेगा।

10. इसका अतिरिक्त आपकी जो भी मनोकामनाएं होंगी। उन्हे हनुमान जी अवश्य पूर्ण करेंगे।

हनुमान बजरंग बाण को सिद्ध करने की विधि

साधको हनुमान जी के बजरंग बाण को सिद्ध करने के लिए। आपको इसका एक‌ माला‌ यानि 108 बार जाप करना होगा। शुक्ल पक्ष का मंगलवार, हनुमान जयंती, नवरात्रों के मंगलवार, पूर्णिमा के मंगलवार या ग्रहण मे एक माला‌ जाप करके सिद्ध कर सकते है। इसे आप हनुमान के मंदिर या घर मे भी सिद्ध कर सकते है।

बजरंग बाण घर मे सिद्ध करने की विधि

यदि आप हनुमान बजरंग बाण को घर मे रहकर सिद्ध करना चाहते है। तो एक लकड़ी या ईंटों से चौंकी बना ले, और उसके ऊपर लाल रंग का सवा दो मीटर कपड़ा बिछा। एक हनुमान मान जी का श्री राम चंद्र जी के साथ चित्र स्थापित कर लें। और देसी घी का दिपक व धूप लगाएँ। एक पानी‌ कलश हनुमान जी के चित्र के सामने रखे। गणेश भगवान, कुलदेवी देबता, वह अपने पित्तर देवता को स्मरण करें। और संकल्प ले। उसके पश्चात जाप आरम्भ करें। यदि आपका गुरु है। तो गुरु मंत्र का जाप करे। अगर नही है। तो रहने दें।

बजरंग बाण मंदिर, ग्रहण मे सिद्ध करने की विधि

साधको अगर आप मंदिर मे करते है। तो ऊपर वाली विधि सेम है। बस हनुमान का चित्र व चौंकी लगाने की आवश्यकता नही। यदि आप ग्रहण मे‌ सिद्ध करते है।‌ कुछ भी करने की जरुरत नही। दरबार व धूप दीप भी लगाने की आवश्यकता नही। आप एक कपड़ा बिछा कर,‌ पूर्व की तरफ मुख करके बैठ जाए और बजरंग बाण का पाठ आरंभ करें। जाप संख्या एक माला। साधको यदि आपको संकल्प नही पता क्या होता है। इसे कैसे लेते है। तो यहाँ क्लिक करें। 👇

Sankalp kya hota hai ।। संकल्प कैसे करते है।

हनुमान बजरंग बाण ( Hanuman bajrang baan siddhi )

।। दोहा ।।

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥

Hanuman bajrang baan siddhi

।। चौपाई ।।

जय हनुमंत संत हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
जन के काज विलंब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै॥

जैसे कूदि सिंधु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥
आगे जाय. लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम-पद लीन्हा॥।
बाग उजारि सिंधु महं. बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

अछय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा+!
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भी॥

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी॥
जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर होय दुःख करहु निपाता।

जय गिरिधर जय जय सुख-सागर। सुर-समूह – समरथ भट-नागर॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिं मारु बज़ की कीले॥
गदा बज़ लै. बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥

ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
ॐ हीं हीं हीं हनुमंत कपीशा। ॐ हूँ हूँ हूँ हनु अरि उर शीशा ॥

सत्य. होहु हरि शपथ पायके। राम दूत धरु मारु जाय के ॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥

।। चौपाई ।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हाँ दास तुम्हारा ॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥

पांय परों कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकर सुवन वीर हनुमंता॥

बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥
भूत, प्रेत, पिशाच, निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर॥

इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की। राख नाथ मरजाद नाम की ॥

जनक सुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलंब न लावो॥
जै जै जै धुनि होत अकाशा। सुमिरत होय दुसह दुःख नाशा॥।

चरण शरण कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं॑ चं॑ चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हैं हूं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥

अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनंद हमारो॥
यह. बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहो फिर कौन उबारे॥

पाठ करे बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा कर प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत-प्रेत सब कांपै॥

धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा॥

Sarv karya siddh mantra ।। गुप्त शक्तिशाली व प्राचीन मंत्र

।। दोहा ॥

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरे उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥

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